फिर लौटने का मन करता है
आज़ाद रहने का मन करता है
धूल को समेट कर गीली माटी से
उँगलियों के निशाँ बनाने का मन करता है
आवारा गलियों में कद से दुगुनी
सवारी करने का मन करता है
गांव में तालाब के घाट पर बैठकर
मछलियों से खेलने का मन करता है
यहाँ जीवन कुछ बंधा सा है
कुछ तागे खोलने का मन करता है
दिन-ब-दिन बहती नीरसता में
कुछ रस घोलने का मन करता है
लौटना तो निश्चित ही दीखता है
क्योंकि अक्सर सब छोड़ देने का मन करता है
फिर लौटने का मन करता है
आज़ाद रहने का मन करता है
और इन सब से ज़रूरी भी कुछ है
अपनी लय में लौटने का मन करता है।
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