तरसती हैं मेरी आँखे
तेरा दीदार करने को
तड़पती हैं ये अब बाँहे
तुझसे अंक लगने को
चाहता है ये दिल फिर से
धड़कना तेरे सीने में
बस तेरे ही ख्वाब आते हैं
मेरे हर रात सोने में
मैं कर न पाया था
मुकम्बल बात जो तुझसे
अधूरी छूट जाती है
ख्वाबों में वो मुझसे।