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कविता

Ankit Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तरसती हैं मेरी आँखे
        
                                                    
                            
तेरा दीदार करने को
तड़पती हैं ये अब बाँहे
तुझसे अंक लगने को
चाहता है ये दिल फिर से
धड़कना तेरे सीने में
बस तेरे ही ख्वाब आते हैं
मेरे हर रात सोने में
मैं कर न पाया था
मुकम्बल बात जो तुझसे
अधूरी छूट जाती है
ख्वाबों में वो मुझसे।
3 वर्ष पहले
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