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मोहब्बत

Ankita Sharma

Mere Alfaz
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                            मोहब्बत भी अजीब है
        
                                                    
                            
दबे पांव आती है
शोर शराबे सी जिंदगी में
खामोशी छोड़ जाती है
जिस वक़्त सम्हले लगते हैं
तिनको में बिखेर जाती है
लाख कोशिश कर लो रोकने की
ये कहां रुक पाती है
मोहब्बत भी अजीब है
दबे पांव आती है,
सोची समझी जिंदगी से
ये कोसों दूर ले जाती है
तन्हाई भरी रातों में
ये यादों की बरसात लगा जाती है
मोहब्बत भी अजीब है
दबे पांव चली आती है,
किसी महफ़िल में ढूंढने बैठो
तो ये कहां मिल पाती है
जिस पल इसकी उम्मीद ना हो
तब ही ये हवा की तरह छु जाती है
मोहब्बत भी अजीब है
दबे पांव चली आती है,
एक पल के एहसास से
ताउम्र की कहानियां दे जाती है
किस्से कहानियों में बुन कर
एक अलग ही दुनिया में ले जाती है
मोहब्बत भी अजीब है
दबे पांव चली आती है।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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