विज्ञापन

वाह-वाह

Ankur Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सालों में खड़ा हुआ
        
                                                    
                            
ताड़-ताड़ खाकर फूला
भ्रष्ट टॉवर
सेकेंड्स में गिरा
वाह-वाह हुई
गिरने को मिली दाद
लेकिन किसने सोचा
वाह-वाह से पहले
क्या सच में गिर गया
भ्रष्ट टॉवर

नहीं-नहीं
अभी बाकी है
पानी की बर्बादी
पैसे की जालसाज़ी
साँसों की गति
जो दबी है
दो मंज़िला कब्रगाह में
टॉवर की
जिससे बनेगी
भ्रष्टता-दूषिता की
एक टनल भूमिगत
जो न दिखेगी
टॉवर की तरह खड़ी-तनी

नौ सेकेंड्स में गिरा टॉवर
खड़ा रहेगा अनिश्चित काल तक
यूँ ही
अजर-अटूट-अखंड
जब तक होगी
वाह-वाह
और मिलेगी दाद
बनती रहेगी भूमिगत टनल

~अंकुर 'तरंग'
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aalam-e-Ghazal Parvez

273 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

11917 कविताएं

View Profile