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मैं बेचारा

Anmol Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं बेचारा,
        
                                                    
                            
सुख में, दुख में समय के मुख में,
तम में, भ्रम में, शंकित क्रम में।
जीवन की सूखी शाखा पर,
बैठी तितली जैसी यादें,
टूटी डाली उड़ गई तितली,
खड़ा वृक्ष सा मैं दुखियारा।
मैं बेचारा।

पथ पर, श्लथ पर, भाग्य के रथ पर,
भय पर, जय पर, सूर्य के हय पर।
सतरंगी किरणें दुनिया की,
छम छम करती आती जाती,
इन सबसे मैं लगा के बाजी,
जब जब जीता तब तब हारा।
मैं बेचारा!

छल से, बल से, अगणित दल से,
जर से, शर से, व्यर्थ के कर से।
सत्ता मद में चूर-चूर हो,
बंधित करना चाहे मुझको,
क्षण-प्रतिक्षण इस जीवन रण में,
भेद-भेद कर हृदय हमारा।
मैं बेचारा!

~अनमोल
 
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4 वर्ष पहले
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