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जो वादे थे अपने

anoop kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो वादे थे अपने,निभाता रहूंगा
        
                                                    
                            
तुम्हें हर ग़ज़ल में, गुनगुनाता रहूंगा ।।

लौट के तुम ना आओगे, मालूम हमें
फिर आवाज तुमको, मैं लगाता रहूंगा ।।

टूटे ख्वाबों को, मैं सजाता रहूंगा,
होंठ जलते मगर मैं, मुस्कुराता रहूंगा ।।

गम अंधेरे के क्या,डराएंगे मुझको
उम्मीदों का चिराग, मैं जलाता रहूंगा ।।

तुम मिलो ना मिलो,कोई परवाह नहीं
तेरी यादों को दुल्हन, बनाता रहूंगा ।।

सबके लबों पर एक दिन,छा जाऊंगा मैं
तेरे नाम से एक गीत, मैं सुहाना लिखूंगा ।।
3 वर्ष पहले
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