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शायरी

Anu papanai

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोहराम मचा है शहरों में आजकल
        
                                                    
                            
तुम अपने शहर में हिफ़ाजत से रहना
पूरी जिंदगी पड़ी है मुलाकातों के लिए
फ़िलहाल अपने आशियाने में पैर टिकाये रखना.....

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले
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Rajiv Tyagi

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