हार से भेंट हुई कल ही
गलत साबित हुई तुम्हारी चुनी राह ही
अडिग तुम आज नयी उम्मीद जगा रहे हो
फिर भी मुस्कुरा रहे हो तुम।
पग बढ़ाया जहां भी
कांटे उभर आये उधर ही
अमिट तुम आज सहज आगे बढ़ते जा रहे हो
फिर भी मुस्कुरा रहे हो तुम।
दिल लुभाया जिसे भी
दूर किया भाग्य ने उसे ही
अद्वितीय तुम आज नयी जगह मन लगा रहे हो
फिर भी मुस्कुरा रहे हो तुम।
वक्त अरसे से खेल रहा तुमसे ही
निकल जाता है निष्ठ़ुर वो तुम्हें छोड़ पीछे ही
असाध्य तुम आज उम्र को मात दे बेझिझक योजना गड़ रहे हो
फिर भी मुस्कुरा रहे हो तुम।
- योगी
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