मां...
तुम्हारी गोद में
सिर रख कर,
तुम्हारे पेट से चिपक कर...
मैं को लेती हूं
अपने दुःखों का बोझ
कम कर लेती हूं
बिन कुछ कहें
मैं तुमसे सब कह लेती हूं
मां...
तुम चुप रहती हो
मेरे सिर पर कभी
हाथ भी नहीं फेरती
फिर भी
मुझे पता है
तुम सब समझती हो
बिन कुछ कहे -सुने
तुम मेरा हर दुःख बांट लेती हो
क्योंकि
हमारा रिश्ता लफ्जों का नहीं
बल्कि
एहसासों का है.
है न ! मां.........
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