'अन्वेषक दोहे'
कलम उधार दै देव मगर, ढक्कन लेव निकारि !
काम खतम होतै समय, जेब न लेवैं डारि !! १ !!
मंदिर या सत्संग मां, जूता लेव बचाए !
एक दाहिने गेट के, रक्खौ दूसर बांए !! २ !!
हरा-भरा करि लेव सब,आपन घर-संसार !
बच्चे दुइ तो बहुत हैं, पेड़ लगाव हजार !! ३ !!
चलो दुपहिया ते तबै, हेलमेट लागै पक्का !
पुलिस ते ज्यादा खास हैं- धूल, धूप औ' धक्का !! ४ !!
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