आज़माने की गर होती ख्वाहिश
तो हम आपकी दावत कबूल करते
दिल्लगी दिल से दिल की मंजूर नही
वर्ना आपसे दिल्लगी जरूर करते
- अनवर हुसैन अणु भागलपुरी
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