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आजमाइश

anwar hussain

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                            आज़माने की गर होती ख्वाहिश
        
                                                    
                            
तो हम आपकी दावत कबूल करते 

दिल्लगी दिल से दिल की मंजूर नही
वर्ना आपसे दिल्लगी जरूर करते 

- अनवर हुसैन अणु भागलपुरी

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले
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Rajiv Tyagi

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