फूल बिछे हों या कांटें हो,
राह न अपनी छोड़ो तुम।
चाहे जो विपदा में आये,
मुख को जरा न मोड़ो तुम।
साथ रहे या रहे ना साथी,
हिम्मत मगर न छोड़ो तुम।
नहीं कृपा की भिक्षा मांगों,
कर न दीन बन छोड़ो तुम।
बस खुदा पर रखो भरोसा,
पाठ प्रेम का पढ़े चलो।
जब तक जान बनी हो तन में,
तब तक आगे बढ़े चलो।।
≈ Areeb.•.Khan
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