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अंदर की बारिश

Arshad Rasool

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक अरसा हो चुका था
        
                                                    
                            
सूखा सूखा सा था तन मन
आंखें भी सूख चुकी थीं
किसी के इंतिजार में
कोई मज़ा नहीं गीत मल्हार में

अधखुली खिड़की से
एक हवा का झोंका आया
हवा में न तपिश, न लू थी
एक जानी पहचानी खुशबू थी
सर्द हवा और बारिश एक साथ

बाहर सूखी जमीन पर
अरसे बाद पानी बरस रहा था
अचानक एक याद की टीस उठी
अंदर भी बारिश होने लगी थी

फर्क सिर्फ इतना था
बाहर की बारिश को
सबने महसूस किया
अंदर की बारिश को सिर्फ मैैैंने

 अरशद रसूल



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6 वर्ष पहले
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