आई है बेरोज़गारी
,मची लोगों में हाहाकारी
जो बनना चाह्ते थे अपने देश का सिपाही ,
उनके चहरे पर छाई मायूसी की चिंगारी।
ये ग़रीबी भी है ,रोआई भी है और लोगों
क़े मन में उम्मीदों की बसी गहराई भी है।
जो लोग करते थे वादे रोजगार क़ी ,
उनके खिलाफ अब लड़ने कि बड़ी लड़ाई भी है।
हमें पैसा नहीं सम्मान चाहिये ,हम
गरीबों और जरूरतमंदों के आवाज़ों के
लिये अधिकार चाहिए।
इस देश के युवाओं और लोगों को
बेरोज़गारी नहीं रोज़गार चाहिए।।
अरविन्द कुमार यादव
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