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आहट

A.Sharma poetry

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सोचती हूँ आज यूहीं तन्हा बैठी हूँ तो,
        
                                                    
                            
उसकी मोहब्बत सच्ची थी या मेरा इश्क़?
मेरा गुस्सा सही था या उसकी खामोशी?
उसका प्यार सही था या
उस प्यार के लिए मेरी नफरत?
उसका आगे बढ़ना सही था या
मेरा वहीं खडे होकर उसको देखना?

ऐसे अनगिनत सवाल ना आते मेरे जहन में
अगर कल.....अगर कल
मेरे दिल के दरवाजे पर उसकी आने की
आहट ना होती.....फिर से!!
2 वर्ष पहले
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