सूरज है बहुरंगी,
यह बहुत बड़ा सतरंगी,
कही छांव है , कहीं धूप है,
सूरज की अपनी अलग रीति है,
दुनिया से इसकी अलग प्रीति है।
सूरज है बहुरंगी,
यह है बहुत बड़ा सतरंगी ,
कहीं आधी रात में चमके सूरज,
कहीं सुबह-सुबह ही धमके सूरज,
कभी लाल है कभी है पीला।
कभी ढंका बादलों के नीचे,
कहीं छिपा पहाड़ों की पीछे,
एक ही सूरज जग चमकाया,
बहुत बड़ी है इसकी काया ।
चंदा की यह शान बढ़ाए,
धरती को हरा-भरा बनाए,
अन्नदान यह करता है।
जग का पेट भी भरता है।
सूरज की अपनी अलग रीति है,
दुनिया से इसकी अलग प्रीति है।
(आशीष कुमार शर्मा)
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