जज्बात ऐसे हैं की हर्फ नही हैं लिखने को
तो तुम तो खुद एक नज्म हो, तुम्हे अल्फज़ों की क्या जरुरत।
तुम्हारी मौजूदगी की खुशबू ही काफी है मेरे वजुद को मेहकाने के लिये
तुम तो खुद इत्तर लाजवाब हो, तुम्हे गुलाबों की क्या जरुरत।
नायाब शब्द हैं, बेशुमार बातें हैं
जो तुम्हारी आँखो को पढ़ लें तो फिर किताबों की क्या ज़रूरत।
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