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ज़ज्बात

Ashish Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जज्बात ऐसे हैं की हर्फ नही हैं लिखने को
        
                                                    
                            
तो तुम तो खुद एक नज्म हो, तुम्हे अल्फज़ों की क्या जरुरत।

तुम्हारी मौजूदगी की खुशबू ही काफी है मेरे वजुद को मेहकाने के लिये
तुम तो खुद इत्तर लाजवाब हो, तुम्हे गुलाबों की क्या जरुरत।

नायाब शब्द हैं, बेशुमार बातें हैं
जो तुम्हारी आँखो को पढ़ लें तो फिर किताबों की क्या ज़रूरत।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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