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बकैती...

Ashok Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बसगोती ठाकूर हूँ मैं अशोक है मेरा नाम
        
                                                    
                            
भूलें भटकों को राह दिखाना है मेरा काम।

पढ़ेलिखे बेवकूफों से नित होती मुलाकात
कोशिश करने पर भी समझें ना मेरी बात।

मन्दिर में जाकर के लोग इबादत करते हैं
अपने सुख-समृद्धि की वकालत करते हैं।

कलियुग में ईश्वर को पाना है आसान नहीं
प्रेमभाव से भक्ति करने वाला है इंसान नहीं।

खाईं खुदगई रिश्तों में लोभ लाभ वश भाई
नार पट गए ताल पट गए कटि गई अमराई।

गुरु-शिष्य का नाताआज कलंकित हो गया
नैतिकता का पतन आज सुनिश्चित हो गया।

मातु-पिता की वाणी होती अनमोल है
बच्चों के लिए जो कड़वी भेषज घोल है।

योग - योग सब कहे पर योग करे न कोय
समय-समय पर योग करे तो रोग काहे को होय।

...अशोक
27 मई, 2018
9867889171

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7 वर्ष पहले
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