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प्रणाम माँ !

Ashok Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं रोऊँ, तू हँस दे माँ,
        
                                                    
                            
इस लाल को निहाल कर दे माँ।
जनम दिन है आज मेरा,
खुशियों का सौगात तेरा,
गुल्लक से जो पैसे चुराऊं,
बहनों के मन यूं ललचाऊँ,
इक चाँटा, तू जड़ दे माँ,
इस लाल को निहाल कर दे माँ।
बचपन से बस तुझे सताया,
दर्द-ए-दिल न समझ पाया,
ममता भरी चिरपोटी को,
आँचल की इस रोटी को,
पाँच टुकड़े, तू कर दे माँ,
इस लाल को निहाल कर दे माँ।
न जाने कैसे कि रखवाली,
हर कसौटी में कस डाली,
पंचरत्न का आभार तुझको,
नींद नही है आती मुझको,
थोड़ी हफ़िम चटा दे माँ,
इस लाल को निहाल कर दे माँ।
उड़ते-उड़ते थक गया हूँ,
कब से राह भटक गया हूँ,
रास नही है आती दुनिया,
याद आती है रनिया-जनिया,
घर, तू मुझे बुलाले माँ,
इस लाल को निहाल कर दे माँ।
क्या हूँ मैं समझा दे जरा,
जीने का मतलब बता दे जरा,
मझधार में, मैं अटक गया हूँ,
नज़रों में,मैं खटक गया हूँ,
काला टिका लगा दे माँ,
इस लाल को निहाल कर दे माँ।
 
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4 वर्ष पहले
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