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फेरते ही आंख उनके...बेवफा...

Ashok Srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बेवफा_________
        
                                                    
                            

फेरते ही आंख उनके
दिल भी बेगाना हो गया
दिल में उठता दर्द प्यारा
अब अजनबी सा हो गया

प्यार भरे शब्द उनके
अर्थहीन लगने लगे
मिलन की जगहें घड़ियां
सब दुश्मन हमारे हो गये

फूल भंवरे चांद तारे
प्यार के हमराज थे
फेरते ही आंख उनके
हमको सताने लग गये

पूछते हैं आज सब ये
क्यूं नहीं मिलते सनम
कैसे कहें जुबां से अपने
सनम बेवफा हो गये

पूछता हर कोई अब
कौन थी वह बेवफा
चीर कर दिल को जिसने
दर्द दिल में भर दिया

-------------------अशोक श्रीवास्तव
राजरुपपुर, इलाहाबाद

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8 वर्ष पहले
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