रंगभूमि में रंग जमा, जब पाप पुण्य से जीता था।
एक तरफ थे सौ कौरव,और एक तरफ थे पांडव पांच।
वो राजसभा थी कुरूवंश की, जहां सत्य पर आईं आंच
हार गया जब पुण्य पाप से, धन दौलत और अंतिम आस।
तब द्रोपदी ने करुण आह से, दी मनमोहन को आवाज।
हे मुरलीधर हे मनमोहन, तुम रखो हमारी लाज,
देवकी नन्दन मोहन ने भी, वस्त्र अंबार लगाया था,
दुष्ट दुशासन से मोहन ने द्रोपदी की लाज बचायी थी,
राजवंश के झूट कपट से, पूरा भारत कुरुक्षेत्र में,
मर मिटने को सज्ज खड़ा था, हर कोई इस महासमर में,
नहीं कहीं हो धर्म लोप, तब गीता ज्ञान सुनाया था,
और सत्य को विजय दिलाने, कौरव वंश मिटाया था
राजवंश के झूट कपट ने, एक महायुद्ध को जन्म दिया
महामुनि जी वेदव्यास ने, महाभारत का नाम दिया
- आशुतोष कुकरेती
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