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कड़वा सच

Ashutosh Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नेताओं को भी बिकते देखा है
        
                                                    
                            
जनता को भी घुटते देखा है
मुँह मोड़ लेते है इंसानियत से जब लोग
इंसानियत को भी मरते देखा है

अंधकार को भी बढ़ते देखा है
उजालों को भी घटते देखा है
मिल गई है ईमानदारी अब अंधकार में
इंसानो को भी डरते देखा है

ग़द्दारों को भी बचते देखा है
गरीबों को भी तड़पते देखा है
झुक रहा सर अब बेईमानों के सामने
इंसानियत को भी मरते देखा है

आशुतोष पाण्डेय
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

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4 वर्ष पहले
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