जिस पर मै सफर करता हूं
जिस मै गुजर करता हूं......
वो है मेरी रोजी रोटी
जो है मेरी रेलगाड़ी
कहकर नजर करता हूं .......
उम्मीद ही है जिसके
दो पहिये जिस पर मै
बसर करता हूं........
नीला आकाश है जिसका सफर
ऐसा ही मै
जिकर करता हूं........
धरा है जिसका स्टेशन
पहाड़ है जिसकी उचाइया
ऐसा मै हुनर रखता हूं........
इक मोल हो धरा के मानिंद
सारे विश्व की रोजी रोटी
ऐसी मै कसर रखता हूं........
मै तो सफर करता हूं
मै तो सफर करता हूं
मै तो सफर करता हूं........