ये चलन है तो यही तकदीर होनी चाहिए
आइनों पे झूठ की तस्वीर होनी चाहिए
रात से कह दो ये ख्वाबों का बिछौना फाड़ दे
ख्वाब हैं तो ख्वाब की तावीर होनी चाहिए
तुम हुकूमत के नशे में तुम क्या समझोगे हमें
गर समझना है तो दिल में पीर होनी चाहिए
आसमाँ उड़ने को है फिर पंख को क्यों तोड़ते
बेटियों के पैर ना जंजीर होनी चाहिए
सिसकियाँ सुनता गरीबों की यहाँ अब कौन है
हूक दिल की अब कलेजा चीर होनी चाहिए
अब नहीं महफूज़ माँ की कोख में भी बेटियाँ
हाथ में बेटी के अब शमशीर होनी चाहिए
सिर्फ हंगामे की बातें लोग सुनते हैं अतुल
दूर तक चीखों की अब तासीर होनी चाहिए
- अतुल पुण्ढीर
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