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बरसात-ए-शराब..

Avinash Dabral

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरसात में गर,शराब बरसने लगेगी,
        
                                                    
                            
खड़ी फसल भी यारों,जलने लगेगी।।

दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा इंसान,
गर ये आग जहां में फैलेने लगेगी।।

इक तो कई रोज़ से धरने पे बैठा है किसान,
गर,बरसात-ए-शराब हुई तो,इक नई जंग छिड़ जायेगी।।

मचेगा कोहराम दिल्ली की सड़कों पर,
कई मासूमों की जान बेख़ता ही जायेगी।।

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5 वर्ष पहले
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