बरसात में गर,शराब बरसने लगेगी,
खड़ी फसल भी यारों,जलने लगेगी।।
दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा इंसान,
गर ये आग जहां में फैलेने लगेगी।।
इक तो कई रोज़ से धरने पे बैठा है किसान,
गर,बरसात-ए-शराब हुई तो,इक नई जंग छिड़ जायेगी।।
मचेगा कोहराम दिल्ली की सड़कों पर,
कई मासूमों की जान बेख़ता ही जायेगी।।
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