समय नहीं पहला यूं आया क्यों हतप्रभ होना
जाग जाग कर सोना फिर फिर समय यहाँ खोना
पाश्चात्य धर्मी होना फिर क्यों रोना धोना
कोरोना कोरोना रोना कोरोना रोना
बोया बीज बबूल पेड़ पर आम कहाँ होना
माटी राखी सदा तिजोरी सोना क्यों होना
काटा वही हुआ जो बोना पाया क्या खोना
कोरोना कोरोना रोना कोरोना रोना
बेवकूफ कह दिया जिसे भी हाथ मिला जो ना
हाथ जोड़ना सभी कहे धरती कोना कोना
अखिल विश्व ने माना फिर क्यों आज चकित होना
कोरोना कोरोना रोना कोरोना रोना
रहे सनातन धर्मी सारे माने क्यों जो ना
बचा रहेगा वही जीव मानुष खाए जो ना
कन्द मूल फल फूल सभी खाए तब ना रोना
कोरोना कोरोना रोना कोरोना रोना
भारतीयता की परिभाषा को क्यों मिल खोना
सदा जागते रहो कहा फिर भी क्यों मिल सोना
ये वसुंधरा कांप रही फिर हतप्रभ क्यों होना
कोरोना कोरोना रोना कोरोना रोना
सम्पूर्णा नन्द द्विवेदी
लखनऊ
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