विज्ञापन

बाज को भरनी है

राजेश्वरी जोशी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बाज को भरनी है,आसमान में ऊँची इक उड़ान,
        
                                                    
                            
तेज हवाओं से भी ,मानता वो कभी हार नही ।
अपने हौसलों पर वो , करता है पक्का यकीं।
दूरियाँ भी उसके लिए, अब कोई दुश्वार नही।

बुलंदियों को छूकर आता , रोज वह बाज है,
बादलों से ऊपर उड़ता, ऊँचाइयों से डरता नही।
बाज को यूँ ही नही कहते ,आसमान का राजा,
इरादे होते बुलंद है , मुश्किलों से घबराता नही।

ऊँची पहाड़ियों , बड़े समंदरों, को पार करता,
तूफानों, बारिशों से भी, डर के वह भागता नही।
आत्मविश्वास से पंखों को , फैलाकर भरता ऊँची उड़ान,
पैनी दृष्टि रखता है मीलो दूर से, भी लक्ष्य को छोड़ता नही।

हौसला रखता है बाज, ऊँची उड़ान भरने का,
मत लड़ों उससे उसे हार ,जाने की आदत नही।
छोटे परिंदे ही ज्यादा पंख ,को फडफड़ाते है,
बाज की उड़ान में कोई , आवाज होती नही।

नीले गगन को रोज अपने, बाँहों में भर लाता है,
बेखौफ, निडर ,ऊँची उड़ान , भरता रुकता नही।
तोड़ने पड़ते है खुद पंजे, चोंच, झाड़ने पड़ते है पंख।
पर वह बाज है असहनीय , पीड़ा में भी रोता नही।

एकांत ,अकेले रहकर हर , पीड़ा सह लेता है वह,
फिर नया जन्म होता , कष्टों से कभी डरता नही।
इसलिए तो वह बाज कहलाता, आसमान का राजा,
सामर्थ, ताकत का नमूना, कष्टों से भी हारता नही ।

तेज परवाज है उसकी, आवाज से तेज उसकी गति,
आसमान का बेताज बादशाह,कभी भी झुकता नही।
बाज को भरनी है, आसमान में एक ऊँची उड़ान,
तेज हवाओं से भी कभी, वो मानता हार नही है।

राजेश्वरी जोशी,
उत्तराखंड
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

350 कविताएं

View Profile