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तोमर छंद "अव्यवस्था"

Basudeo Agarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर नगर है बदहाल।
        
                                                    
                            
अब जरा देख न भाल।।
है व्यवस्था लाचार।
दिख रही चुप सरकार।।

वाहन खड़े हर ओर।
चरते सड़क पर ढोर।।
कुछ बची शर्म न लाज।
हर तरफ जंगल राज।।

मन मौज में कुछ लोग।
हर चीज का उपयोग।।
वे करें निज अनुसार।
बन कर सभी पर भार।।

ये दौड़ अंधी आज।
जा रही दब आवाज।।
आराजकों का शोर।
बस अब दिखाये जोर।।


- बासुदेव अग्रवाल 'नमन' 
तिनसुकिया
3 वर्ष पहले
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