मार्ग यही है !!
माँ अक्सर कहती
“हाथ धो लो “
हाथ धो कर पीछे पड़ जाती
हम खिसियाते
आँखे मिचियाते
कहते “ धुला तो है “
समझाती , “नल खुला तो है “
छोटी सी बात यह
गाँठ बाँध ले मान
शुचिता ही तो है
धर्म का प्रथम सोपान ।
माँ अक्सर कहती
“बाहर मत खाओ “
खाना परोस पीछे पड़ जाती
हम खिसियाते
आँखे मिचियाते
कहते “खाने में हर्ज क्या है “
समझाती “देख तेरा फ़र्ज़ क्या है “
छोटी सी बात यह
गाँठ बाँध ले मान
सात्विकता ही तो है
परम विशुद्ध ज्ञान ।
माँ अक्सर कहती
“घर में ही रहो “
कुर्सी लगा सामने बैठ जाती ।
हम खिसियाते
आँखे मिचियाते
कहते , “मन ऊब चुका है “
समझाती “सूरज डूब चुका है “
छोटी सी बात यह
गाँठ बाँध ले मान
गृह कार्य में ही है
समुचित सम्मान ।
आज सोचती हूँ ,
दूजा ऊपाय नहीं है
सत्य तो वही है
जो माँ ने कही है ।
बीमारी हटाने का
ग़रीबी मिटाने का
स्थिरता लाने का
महामारी हराने का
मार्ग तो यही है , यही है ।।
डा • भारती झा
W/o ब्रह्मानन्द झा
अपर महा प्रबंधक
सुरक्षा विभाग
काँटी
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