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संस्कार

Bhoop Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            न्यारी म्हारी संस्कृति, देवै सभनै मान।
        
                                                    
                            
मात पिता अर गुरु का, करते सब गुणगान।
करते सब गुणगान, देस की महिमा न्यारी।
घी दूध का खाणा, चोखी खिली फुलवारी।
कहै भारती खूब, प्यार तै रह नर नारी।
सिखलावै संस्कार, म्हारी संस्कृति न्यारी।

-भूपसिंह भारती

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6 वर्ष पहले
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