तेरे बगै़र दिल का गुजा़रा नहीं होता
तेरे बगै़र जीना गंवारा नहीं होता
यूँ तो मरते हैं दुनिया में हर रोज़ कई लोग
राहे वफा़ में मरना ख़सारा नहीं होता
प्यास भी शिद्दत की बूझाता नहीं सागर
बंद आँखों से कभी कोई इशारा नहीं होता
अर्स-ए-एहसास में उबरते हुये डूब गये
उस समुन्दर में जहाँ कोई किनारा नहीं होता
तहजी़ब-ए-आरजू़ में मोहलत नहीं शक की
आफ़ताब के आंगन में सितारा नहीं होता
हम क्या गये शहर में तग़य्युर ही आ गया
साया कभी किसी का सहारा नहीं होता
अपने ही ग़मे इश्क़ में जल जल के हुये खा़क
जो आतिश पे ठहर जाये वो पारा नहीं होता
हमने देखा ही नहीं दुनिया कभी तेरी नज़र से
सच बोलने वाला तो बेचारा नहीं होता
इक मैं हूँ कि जि़न्दा हूँ ऐ बुत तेरे हरबे में
ये दिल नहीं होता तो तुम्हारा नहीं होता
ये दिल ही जागीर है वाहिद मेरी हस्ती का
गर दर्द न होता तो हमारा नहीं होता
अरमान-ए-नज़र होते हैं यूँ तो सभी बीनिश
हर शख़्स मगर आँख का तारा नहीं होता
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