इश्क का असर इस कदर हो गया
खुद ,खुद से ही बेखबर हो गया
उसने चूमा था हाथ एक दफा मेरा
जिस्म खुशबूओं से तरबतर हो गया
तुम्हारे साथ चलने से एहसास हुआ यूं
आसान ज़िन्दगी का डगर हो गया
महफूज़ था जब तलक तुम्हारे दिल में थे
निकल कर दिल से दर बदर हो गया
तुम्हीं से था शहर का रौनक "अनोखा"
तुम्हारे जाने से वीराना शहर हो गया