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ग़ज़ल

Binod Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क का असर इस कदर हो गया
        
                                                    
                            
खुद ,खुद से ही बेखबर हो गया

उसने चूमा था हाथ एक दफा मेरा
जिस्म खुशबूओं से तरबतर हो गया

तुम्हारे साथ चलने से एहसास हुआ यूं
आसान ज़िन्दगी का डगर हो गया

महफूज़ था जब तलक तुम्हारे दिल में थे
निकल कर दिल से दर बदर हो गया

तुम्हीं से था शहर का रौनक "अनोखा"
तुम्हारे जाने से वीराना शहर हो गया
3 वर्ष पहले
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