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मां

Brij Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मां
        
                                                    
                            

हम जिसके पन्ने हैं मां वो किताब है,
हम जिसकी खुशबू हैं मां वो गुलाब है।

सारी कायनात सिमटी जिसके अन्दर है,
मां प्रेम का वो गहरा समन्दर है।

मां जनवरी की सर्दी की धूप है,
मां धरती पर ईश्वर का प्रतिरूप है।

मां जून की गर्मी में जुलाई की बरसात है,
मां से ही हैं लफ्ज़ सारे मां ही जज्बात है।

मां से ही खुशियों का हर रंग खिलता है,
मां से ही जीवन का हर अंधेरा मिटता है।

मां हमारी जिंदगी की बुनियाद है,
मां सबसे पहले सारी दुनिया उसके बाद है।

मां हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी दौलत है,
ये नाम ये शोहरत सब उसी की बदौलत है।

मां गीता है बाइबिल है कुरान है,
मां हिम्मत है सहारा है सम्मान है।

बृज लाल तिवारी
198, पोर्टरगंज, पथवलिया
गोंडा। (उ.प्र.)


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6 वर्ष पहले
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