मैं पर्यावरण,
मैंने हमेशा तुम इंसानों को कुछ ना कुछ दिया है,
पर आज कुछ माँगना चाहती हूँ।
आज प्रकृति खतरे में है।
पानी का स्तर नीचा हो रहा है
और पेड़ों का कटाव तेज़।
आज तुम कुछ कर सकते हो,
इन कटते पेड़ों,सुखती नदियाँ,
उजड़ते जानवरों के घरों को तुम बचा सकते हो।
इसलिये कह रही हूँ,
रोक दो तुम ये सब,
कर दो मेरी गोद को हरा-भरा।
इन कटते पेड़ो का दर्द मुझसे सहा नहीं जाता।
नदियाँ जो कभी किसी का प्यास बुझाती,
वो आज खुद प्यासी हैं।
इतने निर्दयी मत बनो तुम,
मोह-विलास की लालच में,
दूसरों का घर मत उजाड़ो तुम।
पोछ दो इन आसूँओं को और मना लो प्रकृति को,
क्योंकि अगर प्रकृति भयावह हो गयी,
फिर सब खत्म कर देगी।
- चाँदनी मण्डल
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