विज्ञापन

क्यूं

Charu Choudhary

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            कभी-कभी मन में यह विचार आता है कि,
        
                                                    
                            
लड़कियों को लड़कों से कम क्यूं समझा जाता है?

लड़कों को कुल का वंश माना जाता है तो,
लड़कियों को बोझ क्यूं माना जाता है?

लड़कों का पढ़ना-लिखना सही माना जाता है तो,
लड़कियों का पढ़ना-लिखना गलत क्यूं माना जाता है?

लड़कों के पैदा होने पर खुशी मनायी जाती है तो,
लड़कियों के पैदा होने पर शोक क्यूं मनाया जाता है?

लड़कियों को घर से बाहर निकलने से रोका जाता है तो,
लड़कों को घर से बाहर निकलते समय उनकी मर्यादा में रहना क्यूं नहीं सिखाया जाता है?
हैरान हूं, दुखी हूं, इस आज़ाद देश में इस छोटी सोच को बढ़ावा क्यूं दिया जाता है?

- चारू चाैधरी

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all