कोरोना ने फिर बदला रूप।
बड़ा वीभत्स और विद्रूप।
चीन से चला भ्रमण कर विश्व।
सुदृढ़ करता अपना अस्तित्व।
आज अफ्रीका कल यूरोप।
बढ़ाता जाता नित्य प्रकोप।
वैज्ञानिक भी हैं हैरान।
बड़ी मुश्किल इसकी पहचान।
यथा मायावी असुर कुरूप।
कोरोना ने फिर बदला रूप।
वायरस नूतन बड़ा विचित्र।
मास्क को रहें पहनते मित्र।
नित्य साबुन से धोएं हाथ।
सेनेटाइजर रखिए साथ।
यथोचित दूरी रखें बनाए।
कोरोना टीका भी लगवाएं।
अभी माहौल नहीं अनुरूप।
कोरोना ने फिर बदला रूप।
साक्षी रामायण पावन।
बदलता रूप रहा रावण।
अंत में क्या निकला परिणाम।
विजयश्री हुई राम के नाम।
भयावह ओमिक्रान बादल।
छटेंगे आज नहीं तो कल।
खिलेगी पहले जैसी धूप।
कोरोना ने फिर बदला रूप।
दीपाली कालरा
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