जीवन में बहुत कुछ खोया तो भी
कुछ पाने की तमन्ना अब बाकी है
अंधेरे में मीलों दूर चलकर तो भी
रोशनी की तलाश अब बाकी है
कभी कभी आंखे भर आए तो भी
होठों पे मुस्कान लाना अब बाकी है
ग़म से दिल पूरी तरह टूट गया तो भी
अपने अंदाज में जोड़ना अब बाकी है
दिन हक़ीक़त में बीत जाती तो भी
रात में सपनों को बुलाना अब बाकी है
भीड़ कितना भी बेरहम होती तो भी
तनहाई में सुकून ढूंढना अब बाकी है
दीपाली कालरा सरिता विहार
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