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मन सुंदर

deepali kalra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मन सुंदर तो जग सुंदर है
        
                                                    
                            
रंग रूप तो छलावा होते हैं
अजर अमर नहीं रहते हैं
ज्यों ज्यों आयु बढ़ती जाती है
वो अपनी चमक खोते जाते हैं ।
देखा है तन की सुंदरता को
सबने एक दिन ढलते हुए
देखा है मन की सुंदरता से
जग में रिश्ते बनते हुए ।
हमने प्रायः सुंदर चेहरे के पीछे
देखी है कुटिलता को छुपे हुए
पर जिनके मन सुंदर होते हैं उनके
देखा है हर काम सुगमता से होते हुए।

दुनिया एक मुसाफिर खाना है
हम सबको यह जग छोड़ जाना है
हम सब तो हैं बस माटी के पुतले
एक दिन माटी में ही मिल जाना है।

धन और दौलत तो यारों
सब यहीं रह जाना है
खाली हाथ हम आए थे
और खाली हाथ ही जाना है।
बाहरी सुंदरता नैनों को
बड़ा सुकून देती है
पर मन की सुंदरता
औरों का चित्त हर लेती है ।

सूरदास जी भी नैनों से अंधे थे
पर कृष्ण रूप का उन्होंने
कैसा सुंदर चित्रण किया था
सुकरात भी चेहरे से बड़े कुरूप थे
आज भी उनको पढ़ते हैं
ऐसा उन्होंने संदेश दिया था ।

जन्म मरण के बंधन से
तू मुक्त हो जाएगा
प्रभु भक्ति में खुद को लगा ले
भवसागर पार हो जाएगा ।

मन अपना पवित्र कर ले
द्वेष ईर्ष्या का त्याग कर ले
जग के हितकारी काम कर ले
मानव सेवा में अपने को लगा ले
यह जग मोह माया का बवंडर है
प्रभु तो बैठा मन के अंदर हैं
कहते हैं मन सुंदर तो जग सुंदर हैं।
दीपाली कालरा

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4 वर्ष पहले
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