नदी कुएं और
ताल सरोवर,
पानी का आधार रहे।
जल से जीवन
जल ही जीवन ,
तुमको हरदम याद कर रहे।
अन्न धान और
खेत-खलिहान,
जल बिन कुछ न संभव है।
जब तब है पानी
नदियों में,
तभी तलक ही जीवन है।
आओ मिलकर
वादा कर लें,
बूंद - बूंद को संचय कर ।
व्यय पानी का
आधा कर लें,
और वृक्ष हर तरफ आऐ नज़र।
पशु पक्षियों
की भी जरूरत,
लगती उनको भी प्यास है।
जितना मेरा
उतना तेरा,
जल सब का अधिकार है।
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