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जल ही जीवन

Deepti V

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नदी कुएं और
        
                                                    
                            
ताल सरोवर,
पानी का आधार रहे।
जल से जीवन
जल ही जीवन ,
तुमको हरदम याद कर रहे।
अन्न धान और
खेत-खलिहान,
जल बिन कुछ न संभव है।
जब तब है पानी
नदियों में,
तभी तलक ही जीवन है।
आओ मिलकर
वादा कर लें,
बूंद - बूंद को संचय कर ।
व्यय पानी का
आधा कर लें,
और वृक्ष हर तरफ आऐ नज़र।
पशु पक्षियों
की भी जरूरत,
लगती उनको भी प्यास है।
जितना मेरा
उतना तेरा,
जल सब का अधिकार है।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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