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शायरी

Desh Bandhu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सामने दीवार थी जो हक़ का सूरज खा गई।
        
                                                    
                            
और एक बादल था वो भी मेरे घर बरसा नहीं।

~ देशबन्धु चौबे
3 वर्ष पहले
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