सियासी चालों की तामीर था
जलाले अकबरी का हर क़दम
ख़तरो से खेलता रहा बे ख़ौफ़
वो सुरमा प्रताप तो प्रताप था।
न झुका जिसका सर कभी
मादरे- वतन का वो सपूत था
गुलामी की सियाह रात में
रोशनी का वो चिराग़ था।
अमर हो गई हल्दीघाटी
कामयाबी होती है नसीब से
सुनहरे हर्फ़ो में लिखा जायेगा
जंगे आजादी - जिसका मक़सद महान था।
उखाड़ दिये थे - जंग में जिसने
फ़ौजे मुग़लिया के बढ़ते क़दम
एक वक्त तो मानसिंह की मौत का भी
हो गया सामना था
लिये भाला हाथ चेतक सवार
वो राणा था महान।
रहेगी क़ायम जब तक दुनिया देखना
हर ज़ुबा कहेगी, बहादुरी की वो मिसाल था।
नौजवानो का वो रहनुमा, जिया-मरा वतन के लिये
वो जाबाज़ हस्ती प्रताप तो प्रताप था।
शैद शैदाई
जनाब
हिम्मत सिंह बारहठ
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