विज्ञापन

निज भाषा

Dinesh Pratap

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाहे जितनीं भाषा सीख लें,...... .और जान लें,
        
                                                    
                            
और सीख कर भाषाएँ,... .. कितना भी ज्ञान लें,
लेकिन स्वप्न देखना हो,या करनी मन की बात,
केवल संभव निज भाषा में,..... . .खूब जान लें।

"दिनेश प्रताप सिंह चौहान'

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

350 कविताएं

View Profile