फागुन की होली,
हाय रंगों की होली।
धरती को सबने है ,
रंगीन कर डाली।।
ब्रज की ये होली,
जिसने है खेली।
लट्ठमार होली भी,
है अजब निराली।।
अवध में होली,
श्री राम हैं खेले।
ब्रज में खेले हैं,
होली मुरली वाले।।
संग मिल खेलेंगे होली,
रंगीली है अपनी वाली।
चुनर करेंगे पीली-नीली,
आएगी फागुन की होली।।
दीपनारायण झा 'दीपक
देवघर, झारखंड
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