माना कि साथ नहीं खेले, हम और दीदी एक आंगन में
पर जैसे सारी की सारी खुशियां, है दीदी के दामन में
दीदी है, कुछ सपने है, और थोड़ी मेरी शैतानी है...
उनकी समझ आसमां जितनीं, उतनी मेरी नादानी है...
सारे कांटे देकर उनको, फूलो का बागान इकट्ठा करते है...
जब दीदी से मिलकर हम, मुस्कान इकट्ठा करते है...
दीदी, इन दो अक्षर से मिलकर, मेरी दुनिया पूरी होती है...
जैसे हर रिश्ते से बढ़ करके, एक बहन जरूरी होती है....
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