मुझे आदत है कुछ अलग लिखने की सोच मैं स्वच्छंद रखती हूँ
घुटे कमरों में मुझे पसंद नहीं है रहना मैं प्रकृति से प्रेम रखती हूँ।
उड़ जाती हूँ नील गगन में बिना पंख भी हौंसला ये रखती हूँ
विषय भले कई उलझे से हैं पर विचार आज़ाद रखती हूँ।