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स्वच्छंद

Dr. Manjeet

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझे आदत है कुछ अलग लिखने की सोच मैं स्वच्छंद रखती हूँ
        
                                                    
                            
घुटे कमरों में मुझे पसंद नहीं है रहना मैं प्रकृति से प्रेम रखती हूँ।
उड़ जाती हूँ नील गगन में बिना पंख भी हौंसला ये रखती हूँ
विषय भले कई उलझे से हैं पर विचार आज़ाद रखती हूँ।
3 वर्ष पहले
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Rajiv Tyagi

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