तू मेरे पास है
तेरे करीब होने भर के अहसास से
मैं कितनी बेफिक्र हो गई
मैं चाहे फिर तुझसे बात
करूं या न करूं
तेरे समीप बैठूं या न बैठूं
तेरी सूरज की रोशनी से भरे
उजाले से
धुलकर मैं तो
अंधेरे से मुक्त और
एक रूहानी चांदनी के अंबार
की तरह
पाक साफ हो गई।
- मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।