विज्ञापन

गेंद

Drminal Aggarwal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे पास एक खिलौना है
        
                                                    
                            
जिसका नाम गेंद है
इससे मैं बचपन में खेलता था
और आज प्रौढ़ावस्था में भी
खेलता हूं
आगे भी खेलता रहूंगा
घर के कमरे
लॉन
आंगन
छत
फर्श या
दीवार
इसे कहीं पर भी फेंका या
मारा जा सकता है
खेल के मैदान में भी
लेकिन मैं कोई मंझा हुआ
खिलाड़ी नहीं
न ही दर्शक बटोरने का या
उनसे वाहवाही बटोरने का कोई
शौक रखता हूं
मैं तो खुद ही हूं
एक छोटा मोटा खिलाड़ी
और खुद ही अपनी प्रतिभा का
दर्शक, प्रशंसक और
आलोचक
न मुझे प्रोत्साहन के लिए
भीड़ जुटानी है
न शोहरत पाने के लिए
इस दुनिया के शोर में कोई
डुगडुगी बजानी है
मेरा घर
मेरे घर का कमरा ही
मेरी दुनिया
मेरा रास्ता, मेरी मंजिल
मेरी आवाज, मेरी गूंज
मेरा दिल ही मेरा आईना
जो लाये कभी मुझे
मेरे बहुत करीब
और ले जाये कभी मुझे मुझसे ही
कहीं बहुत दूर।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

350 कविताएं

View Profile