मेरे पास एक खिलौना है
जिसका नाम गेंद है
इससे मैं बचपन में खेलता था
और आज प्रौढ़ावस्था में भी
खेलता हूं
आगे भी खेलता रहूंगा
घर के कमरे
लॉन
आंगन
छत
फर्श या
दीवार
इसे कहीं पर भी फेंका या
मारा जा सकता है
खेल के मैदान में भी
लेकिन मैं कोई मंझा हुआ
खिलाड़ी नहीं
न ही दर्शक बटोरने का या
उनसे वाहवाही बटोरने का कोई
शौक रखता हूं
मैं तो खुद ही हूं
एक छोटा मोटा खिलाड़ी
और खुद ही अपनी प्रतिभा का
दर्शक, प्रशंसक और
आलोचक
न मुझे प्रोत्साहन के लिए
भीड़ जुटानी है
न शोहरत पाने के लिए
इस दुनिया के शोर में कोई
डुगडुगी बजानी है
मेरा घर
मेरे घर का कमरा ही
मेरी दुनिया
मेरा रास्ता, मेरी मंजिल
मेरी आवाज, मेरी गूंज
मेरा दिल ही मेरा आईना
जो लाये कभी मुझे
मेरे बहुत करीब
और ले जाये कभी मुझे मुझसे ही
कहीं बहुत दूर।
मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001
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