विज्ञापन

आज भी ख़्वाब हैं निगाहों में

Fouzia Naseem

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुंतज़िर आज भी है दिल तेरा ।
        
                                                    
                            
आज भी ख़्वाब हैं निगाहों में ।।

- डाॅ फौज़िया नसीम शाद


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all