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ग़ज़ल

संजय पाण्डेय

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पत्थरों से रोने की आदत न बना ।
        
                                                    
                            
बद से बदतर अपनी हालत न बना ।।
दो चार थपेड़े तो सहने की हो ताकत।
जो छूने से गिर जाय ऐसी छत न बना।।


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6 वर्ष पहले
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