आज बिन मौसम भंवरे गुनगुना रहे हैं,
कुछ तो है जो अपनी भाषा में सुना रहें हैं।
मेरी धड़कन में उदासी छा रही है,
लगता है बिछड़ने की घड़ी आ रही है
-"सोनू श्रृंगोत"